भाषा: हिन्दी

2 साल की उम्र से ज़ोर से पढ़कर सुनाना — घर पर पढ़ने की आदत कैसे डालें

किनके लिए: 2 से 7 साल के बच्चों वाले परिवारविषय: भाषा, शब्द-भंडार, ध्यान और भावनात्मक जुड़ाव
लेख का चित्र: 2 साल की उम्र से ज़ोर से पढ़कर सुनाना

1. इतनी जल्दी ज़ोर से पढ़कर सुनाना क्यों

साथ मिलकर पढ़ना शुरुआती बचपन की सबसे संपूर्ण गतिविधियों में से एक है: इससे शब्द-भंडार बढ़ता है, समझ बेहतर होती है, ध्यान देर तक टिकता है और बड़े व बच्चे के बीच जुड़ाव का एक पल बनता है।

बच्चे का पढ़ना जानना ज़रूरी नहीं। चित्र देखना, उँगली से दिखाना, शब्द दोहराना और आगे क्या होगा इसका अंदाज़ा लगाना — यह सब भी पढ़ना ही है।

2. तेते: जिज्ञासा ही असली ताक़त

परिवार का किताबों का शौक़ीन तेते सबके सवालों के जवाब किताबों में ढूँढता है। उसका ख़ास वाक्य, "चलो, पता लगाते हैं!", पढ़ने को स्कूल का बोझ नहीं, बल्कि रोज़ के रहस्य सुलझाने का औज़ार बना देता है:

3. उम्र के हिसाब से काम की बातें

और गाइड